प्यार किया किसी और को, मस्ती और के साथ।
अन्दर रिश्ता और था, बाहर राखी बाँधी हाथ।
धन के लालच फिर फँसी, हमें भी फँसाया साथ।
सच बोल, विश्वास कर, अब पीट रहे हम माथ।
"मुझे संसार से मधुर व्यवहार करने का समय नहीं है, मधुर बनने का प्रत्येक प्रयत्न मुझे कपटी बनाता है." -विवेकानन्द
तथाकथित "असहिष्णुता" पर एक देशभक्त की रचनाtags: *** |
विज्ञान नहीं संदेह बिना। समझ नहीं स्पष्ट बिना। स्पष्ट नहीं विश्लेषण बिना। संपूर्ण नहीं संश्लेषण बिना। निष्कर्ष नहीं अन्वेषण बिना। शोध ...
"स्वतन्त्र भारत में नारी को मिले वैधानिक अधिकारों की कमी नहीं- अधिकार ही अधिकार मिले हैं, परन्तु कितनी नारियां हैं जो अपने अधिकारों का सुख भोग पाती हैं? आप अपने कर्तव्यों के बल पर अधिकार अर्जित कीजिए। कर्तव्य और अधिकार दोनों का सदुपयोग कर आप व्यक्ति बन सकती हैं। आपको अपने कर्तव्यों का भान है तो कोई पुरुष आपको भोग्या नहीं बना सकता-व्यक्ति मानकर सम्मान ही करेगा। इसी तरह आने वाली पीढ़ी आपकी ऋणी रहेगी।"