आपकी ही हर जिद हर पल पूरी होती आई है।
जिसको चाहा उसको भोगा, की जो मन को भाई है।
इच्छा है अपनी तो बस एक बार फिर मिल पायें हम,
हम तो हर पल पाट रहें हैं जो बीच हमारे खाई है।
"मुझे संसार से मधुर व्यवहार करने का समय नहीं है, मधुर बनने का प्रत्येक प्रयत्न मुझे कपटी बनाता है." -विवेकानन्द
स्वतंत्र रहें, स्वछंद रहें हम। खुशी मिले या मिलते गम। अपना पथ, अपना निर्णय, परिणामों को स्वीकारें हम। नहीं किसी के अनुगामी हैं। लक्ष्य...
"स्वतन्त्र भारत में नारी को मिले वैधानिक अधिकारों की कमी नहीं- अधिकार ही अधिकार मिले हैं, परन्तु कितनी नारियां हैं जो अपने अधिकारों का सुख भोग पाती हैं? आप अपने कर्तव्यों के बल पर अधिकार अर्जित कीजिए। कर्तव्य और अधिकार दोनों का सदुपयोग कर आप व्यक्ति बन सकती हैं। आपको अपने कर्तव्यों का भान है तो कोई पुरुष आपको भोग्या नहीं बना सकता-व्यक्ति मानकर सम्मान ही करेगा। इसी तरह आने वाली पीढ़ी आपकी ऋणी रहेगी।"
No comments:
Post a Comment
आप यहां पधारे धन्यवाद. अपने आगमन की निशानी के रूप में अपनी टिप्पणी छोड़े, ब्लोग के बारे में अपने विचारों से अवगत करावें.