Saturday, June 6, 2026

साईकिल की सवारी

 बाल, किशोर, युवा, वृद्ध, सबको भाए सबको प्यारी।

साईकिल की करो सवारी, इसकी शान है सबसे न्यारी।। 

पर्यावरण के लिए सुखारी।

सबके लिए ही है हितकारी। 

स्वास्थ्य का पैकेज नहीं है भारी, 

साईकिल निकाल करो तैयारी। 

जिम की नहीं है कोई जरूरत, कसरत होती इससे सारी। 

साईकिल की करो सवारी, इसकी शान है सबसे न्यारी।। 

पेट्रोल, डीजल नहीं चाहिए। 

लाइसेंस बिन चलते जाइए। 

नहीं शोर, नहीं वायु प्रदूषण, 

मस्त चाल से चलते जाइए। 

रोगों पर चलती बनकर आरी,घंटी लगती कितनी प्यारी। 

साईकिल की करो सवारी, इसकी शान है सबसे न्यारी।। 

अपने क्षमता, अपनी गति है। 

साईकिल सवार की तीक्ष्ण मति है। 

साइकिल से मंजिल पर जाओ, 

जिसको खुद से और घर से रति है। 

भिन्न आकार, रंग भिन्न हैं, बजट नहीं है इसका भारी। 

साईकिल की करो सवारी, इसकी शान सबसे न्यारी।। 

Tuesday, June 2, 2026

कर्म का कोई विकल्प नहीं है

 अविरल चलना जीवन पथ पर, यात्रा है, कोई संकल्प नहीं है।

कर्म बिना कोई जी नहीं सकता, कर्म का कोई विकल्प नहीं है।। 

चाह से चुनी हो या अनचाहे। 

दुख में या सुख में  अवगाहे। 

यात्रा का आनंद ले प्यारे, 

गंतव्य पहाड़ हो या हो माहे। 

जीवन जिओ,आनंद का पथ है, जीवन,कोई प्रकल्प नहीं है। 

कर्म बिना कोई जी नहीं सकता, कर्म का कोई विकल्प नहीं है।। 

नफरत से भी प्यार करें हम। 

चाह करें क्यूँ? विश्वास करें तुम। 

पैसा सब कुछ तुम्हारे लिए है, 

हमारे लिए तो सब कुछ हो तुम। 

कर्म के बल पर मिला जो पथ पर, पर्याप्त है वह, स्वल्प नहीं है। 

कर्म बिना कोई जी नहीं सकता, कर्म का कोई विकल्प नहीं है।। 

कर्म ही केवल,विकास के पथ हैं। 

कर्म ही सबके, जीवन के रथ हैं। 

कर्म के बिन निष्क्रिय मृत शरीर, 

कर्म ही सबके जीवन का अथ है।

कर्म समाया है अंग-अंग में,  कर्म बिन कोई अभिकल्प नहीं है।

 कर्म बिना कोई जी नहीं सकता, कर्म का कोई विकल्प नहीं है।। 


Saturday, May 30, 2026

जीत हार अब पीछे छूटी

 नहीं चाह अब रही हमारी, चाह रहे बस खुशी तुम्हारी। 

जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।। 

कैसे खुश रहना सीखो तुम, 

चलना ही जीवन सीखो तुम। 

सुनना और देखना सीखो, 

चुप रहना भी सीखो तुम।

नहीं कोई इच्छा थोपेंगे हम, नहीं रोकेंगे राह तुम्हारी। 

जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।। 

लोगों की सुनना छोड़कर। 

नहीं जोड़ना तुम्हें तोड़ कर। 

मन की कर लो, खुशियाँ जी लो, 

नहीं ले जाना तुम्हें मोड़ कर। 

अपनी करना, अपना जीना, खुलती जाएं राह तुम्हारी। 

जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।। 

अपने को स्वीकार करें हम। 

जीना छोड़ें औरों के गम। 

अपने लिए हो समय हमारा, 

दिल से अपने कर्म करें हम। 

मन-वचन और कर्म एक हो, खुशियाँ गाएं राह तुम्हारी। 

जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।। 

पास होने की नहीं है चाहत। 

नहीं चाहिए अब कोई राहत।

अपनी सोच उतार जमीन पर, 

पूरी कर अब अपनी चाहत। 

उत्कर्ष की राह बढ़ो तुम, प्रफुल्लित हों बांह तुम्हारी। 

जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।। 


Sunday, May 24, 2026

लोगों का क्या? कहते कुछ भी,

 लोगों का क्या?


लोगों का क्या? कहते कुछ भी, आगे बढ़ते जाना है।

पथिक हैं हम और पथ जीवन है, चलते-चलते गाना है।।

नहीं किसी को सीख है देनी।

सबकी अपनी-अपनी बेनी।

नहीं किसी को सीख है भाए,

खुद ही खुद से सीख है लेनी।

सबका अपना-अपना पथ है, अपना कर्म कर पाना है।

पथिक हैं हम और पथ जीवन है, चलते-चलते गाना है।।

कारण बिन कोई कार्य न होता।

काटत है नर, जो है वह बोता।

कर्म के बिना, नहीं कुछ मिलता,

नकल करे नर, वह है रोता।

अपना वही, अपनत्व जहाँ है, जिसने अपना माना है।

पथिक हैं हम और पथ जीवन है, चलते-चलते गाना है।।

प्रक्रिया है खुद ही सफलता।

कर्म बिना कैसी असफलता?

चलने की बस चाह निराली,

जिस पथ चलते, वह है फलता।

प्रकृति से संचालित अवयव, किया नहीं, मनमाना है।

पथिक हैं हम और पथ जीवन है, चलते-चलते गाना है।।

लोगों का नहीं कोई ठिकाना।

जहाँ जाओगे, वहीं है पाना।

असफलता पर वे हँस देंगे,

सफलता पर, ताली बजााना।

जो चाहे, वह हमको कह ले, कर्म ही अपना ठिकाना है।

पथिक हैं हम और पथ जीवन है, चलते-चलते गाना है।।


Friday, April 3, 2026

पल-पल मिलना, पल-पल खिलना

 पल-पल मिलना, पल-पल खिलना, पल-पल बिछड़न ही जीवन है।

धोखा, कपट, षडयंत्र तो विष हैं, प्रेम की धड़कन संजीवन है।।

प्रेम है मरना, प्रेम है जीना।
प्रेम में चाहत बनती चीन्हा।
प्रेम है दर्पण, प्रेम है अर्पण,
विष पीकर, अमृत है दीना।
प्रेम नहीं उपहार में मिलता, भले ही भला कोई श्रीमन है।
धोखा, कपट, षडयंत्र तो विष हैं, प्रेम की धड़कन संजीवन है।।
प्रेम में चाहत नहीं है हमको।
प्रेम की चाहत जग में सबको।
प्रेम पाने की वस्तु नहीं है,
खुद ही प्रेम करते हैं खुद को।
बाधाओं से लड़ हम बढ़ते, प्रेम का कण-कण नीमन है।
धोखा, कपट, षडयंत्र तो विष हैं, प्रेम की धड़कन संजीवन है।।
अजस्र स्रोत है हिय में अपने।
नहीं देखने प्रेम के सपने।
नहीं प्रेम से रीते हैं हम,
निकले हैं हम प्रेम में तपने।
प्रेम के लिए नहीं, समय की सीमा, पल-पल प्रेम का सीजन है।
धोखा, कपट, षडयंत्र तो विष हैं, प्रेम की धड़कन संजीवन है।।