Sunday, July 5, 2026

देत जीत को मात

 कर्महीन के पास हैं, चिंता और अवसाद। 

कर्मयोग के साथ हैं, फर्स अर्श की खाद।।


कर्ता को ना चाह है, आए कोई साथ। 

कर्म सदा ही साथ है, ले हाथों में हाथ।। 


समय प्रतीक्षा ना करे, चलता है दिन-रात। 

व्यक्ति प्रतीक्षा करत जो, देत जीत को मात।। 


जीवन का इक राज है, चलने में है जीत। 

रुकने में ना काज है, नहीं बचत है प्रीत।। 


प्रेम जहाँ, है चाह ना, ना बंधन, ना रीत। 

जहाँ मौन में गान है, हार यहाँ है जीत।। 


प्रेम प्रेम जग गा रहा, पाया कोई जान? 

खुद में खुद को खोजता, प्रेमी वही महान।। 


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