Friday, July 17, 2026

ऐसा इन्हें भगवान् चाहिए

 ज्ञान नहीं जो पोथी में।

ज्ञान वही जो ज्योति में।

स्मृति नहीं जो वीथि में। 

स्मृति वही जो रीति में।  


ज्ञान के नाम विछा वितंडा।

तर्क-वितर्क से होता ठंडा।

मार-काट यहाँ मच जाती है,

पहले थी मुर्गी या पहले अंडा।


नहीं किसी को ज्ञान चाहिए।

धन, पद और सम्मान चाहिए।

बिना किए सब कुछ दे जाए,

ऐसा इन्हें भगवान् चाहिए।


ज्ञान वही जो चेतन में।

संग्रह होय अवचेतन में।

मृत्यु का आभास कराए,

मानव जीए अचेतन में।


ज्ञान की देखो राह निराली।

जिसने ज्योति से ज्योति जलाली।

ज्ञान कर्ममय हो जाता है,

वरना राह अज्ञान ने पाली।


राष्ट्रप्रेमी स्वयं का माली।

देता नहीं किसी को गाली।

ना आरोप, नहीं शिकायत,

यात्रा रूपी मंजिल पाली। 

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