नहीं चाह अब रही हमारी, चाह रहे बस खुशी तुम्हारी।
जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।।
कैसे खुश रहना सीखो तुम,
चलना ही जीवन सीखो तुम।
सुनना और देखना सीखो,
चुप रहना भी सीखो तुम।
नहीं कोई इच्छा थोपेंगे हम, नहीं रोकेंगे राह तुम्हारी।
जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।।
लोगों की सुनना छोड़कर।
नहीं जोड़ना तुम्हें तोड़ कर।
मन की कर लो, खुशियाँ जी लो,
नहीं ले जाना तुम्हें मोड़ कर।
अपनी करना, अपना जीना, खुलती जाएं राह तुम्हारी।
जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।।
अपने को स्वीकार करें हम।
जीना छोड़ें औरों के गम।
अपने लिए हो समय हमारा,
दिल से अपने कर्म करें हम।
मन-वचन और कर्म एक हो, खुशियाँ गाएं राह तुम्हारी।
जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।।
पास होने की नहीं है चाहत।
नहीं चाहिए अब कोई राहत।
अपनी सोच उतार जमीन पर,
पूरी कर अब अपनी चाहत।
उत्कर्ष की राह बढ़ो तुम, प्रफुल्लित हों बांह तुम्हारी।
जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।।

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