Wednesday, June 24, 2026

जनता जनार्दन को सुविधाओं का भोग

 जनता जनार्दन

            डा संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

राजा नहीं, सेवक चुनते लोग  

कुर्सी पर बैठना, नहीं है संयोग  

न सोने का सिंहासन, न चाँदी का काम  

जनता जनार्दन को सुविधाओं का भोग  


वोट की स्याही से, बनता है जोग  

उठती है उँगली, मिटते हैं रोग  

महल की दीवार से ऊँचा नाद  

गली-नुक्कड़ पर करते हैं योग


टैक्स का पैसा, पसीने का दाम  

खाते में जाए, या बने गोदाम?  

हिसाब माँगती हर एक शाम  

क्योंकि मालिक असली है आम  


अफसर की कलम, नेता का नाम  

चलते नहीं गर भूखा है गाम  

रोटी का सवाल, शिक्षा का काम  

पहले सुलझे, फिर बाकी प्रणाम  


हर लोक सेवक को ये पैगाम  

सेवा का मौका, नहीं आराम  

जनता रुठे तो छिने तमाम  

क्योंकि लोक में बसता घनश्याम  


जन जन सेवक, राष्ट्रप्रेमी आम  

जनता जनार्दन के प्रेम का जाम  

इसी से चमके भारत महान  

आनन्द से पूरित, शहर और गाम  


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