4.13.2007
कैसे कटें ये है तन्हाई?
हर क्षण याद आपकी आई।
तड़प रहे हम मतलब इसका,
आप भी हमको भुला न पाईं।
ब्लैंक कॉल जब-जब है आती,
खुशी से चौड़ी होती छाती।
गलतफहमी भी कितनी प्यारी,
आप भी हमको याद फरमातीं।
"मुझे संसार से मधुर व्यवहार करने का समय नहीं है, मधुर बनने का प्रत्येक प्रयत्न मुझे कपटी बनाता है." -विवेकानन्द
बाल, किशोर, युवा, वृद्ध, सबको भाए सबको प्यारी। साईकिल की करो सवारी, इसकी शान है सबसे न्यारी।। पर्यावरण के लिए सुखारी। सबके लिए ही है हितक...
"स्वतन्त्र भारत में नारी को मिले वैधानिक अधिकारों की कमी नहीं- अधिकार ही अधिकार मिले हैं, परन्तु कितनी नारियां हैं जो अपने अधिकारों का सुख भोग पाती हैं? आप अपने कर्तव्यों के बल पर अधिकार अर्जित कीजिए। कर्तव्य और अधिकार दोनों का सदुपयोग कर आप व्यक्ति बन सकती हैं। आपको अपने कर्तव्यों का भान है तो कोई पुरुष आपको भोग्या नहीं बना सकता-व्यक्ति मानकर सम्मान ही करेगा। इसी तरह आने वाली पीढ़ी आपकी ऋणी रहेगी।"
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