Thursday, November 19, 2015

पथरीले रास्तों की थकान



जीवन यात्रा के 

पथरीले रास्तों की थकान

कुछ पल चाहा विश्राम,

लहर की मुस्कान

चाहत थी 

पीयेंगे नारियल का

 मृदु शीतल जल

एक हो जायेंगे 

सागर तट पर

 धरती और अम्बर

मालुम न था, 

सागर में आयेगा तूफान,

रोयेगा आसमान

हम होंगे हैरान

 बिखरेगी आपकी मुस्कान।



राधा और कृष्ण

उद्धृत किए थे

जब आपने

लगता था 

आपके हृदय में भी है

प्रेम बीज रूप में

सीचनें से बनेगा वृक्ष!

पल्लवित और पुष्पित होगा

फल भी लगेंगे 

जब हम मिलेंगे

शायद मैं सींच नहीं पाया

और आपके उर का अंकुर

झुलस गया समाज की

कड़ी धूप से।

Wednesday, November 18, 2015

काश! हम मिल पाते आपसे

दिल की धड़कन तेज जब चलतीं

रोते हुए भी ये आँख मचलतीं

चेहरे पर ये, मुस्कान है फीकी

अन्तर में नदियाँ नित, चलतीं।

काश! हम मिल पाते आपसे

दो पल को बतियाते आपसे

आप भले ही हमें भुलाओ,

हम तो हर पल हरषाते आपसे।

प्रसन्न रहो बस, जैसी भी हो

कहना चाहूं कहा नहीं जाये


अनुभूति आप समझ न पाये


दिल की भाषा जुबान न जाने


प्रेमी ही इस गीत को गायें।



आप कहाँ हो? कैसी हो?


चाहा था क्या वैसी ही हो?


हम तो केवल दुआ ही करते,


प्रसन्न रहो बस, जैसी भी हो।


Tuesday, October 20, 2015

आपको याद होगा

यादों में मैं तड़प रहा, पास अब आ जा प्रिये।
मीठे-मीठे बोल बोल, अपने हिय से लगा ले प्रिये।
तड़पन मेरी ही है, तेरी तड़पन का प्रमाण।
दिल को मारकर क्यों? अपने को सताये प्रिये।

मैं भी तड़प रहा प्रिये, आप भी तो तड़प रहीं।
हम दोनों ही हैं एक फिर, आग क्यों भड़क रही।
दुनियाँ के डर से ही आप, हमें क्यों भुला बैठीं?
दुनियाँ है प्यार की दुष्मन, यही है रीति रही।

6.22.2007

मिले थे हुए थे एक कभी हम आपको याद होगा।
रोये थे, हँसे थे, मिलकर कभी, आपको याद होगा।

अस्त होते हुए, चाँद-सी, आप धीरे से मुस्करायीं थीं।
खिले थे आपके गुलाब, होठों के, आपको याद होगा।

षोड्सी बाला की तरह, आपके कपोलों की अरुणाई थी।
पिया था नयनों का जाम हमने मिल, आपको याद होगा।

नदी के सूखे किनारों की तरह, मैं इस पार आप उस पार पड़ीं।
फूल खिलने से पहले ही,मसलीं गईं कलियाँ, आपको याद होगा।

ये डाली भी है सूखती, हर पल, वो डाल भी तो सूख रही।
कलियों से फूल, फूल से फल बनने थे, आपको याद होगा।

Saturday, August 29, 2015

विश्व में हिन्दी जानने वालों की संख्या


भारत में हिन्दी जानने वालों की संख्या


 विश्व की भाषाओं के बोलने वालों का स्थान

Monday, August 10, 2015

अधर आपके रस बरसाएँ

किस्मत को हम नहीं थे मानते, आपको किस्मत मान लिया है।

हमारा नहीं, अब कुछ जग में, यश भी व्यर्थ, यह जान लिया है।

सभी हैं अपने, सभी पराये, दिल ने आपको स्वीकार किया है।

अपना दिया नहीं, हमारा लिया है, दिल को लेकर दगा किया है।


जन्म दिन सदैव आपका आये, चेहरे आपके हरपल मुस्काएँ।

मूर्ख बनाओ, हमको कितना, पल भर यदि मुस्कान दिखाएँ।

हम तो अकेले भी जी लेते, तुमको ही साजन मिल जाएँ।

आप रहो खुश , खुशी  बिखेरो, अधर आपके रस बरसाएँ।

Monday, August 3, 2015

सामने आये वो मूर्ति आपकी

अपनी गाड़ी दिषा से भटकी, नाव तो है पतवार नहीं है।

नदी में भंवर, तूफान हैं सिर पर, लेकिन खेवनहार नहीं है।

हमने तुमको नैया सौंपी, डुबाओं हमें दरकार नहीं है।

बैठे हैं हम करें प्रतीक्षा, प्रेम कोई व्यापार नहीं है।


सुखी रहो आप जहाँ भी चाहो, हमारी खुषी हैं खुषी आपकी।

कोई गलती नहीं करी थी हमने, प्रेम अग्नि नहीं पश्चाताप की।

 मिलने के ही हम आकांक्षी, हम पूरी करें हर इच्छा आपकी।

एक बार बस एक बार प्रिय, सामने आये वो मूर्ति आपकी।

Sunday, August 2, 2015

नजर मिला कहो प्यार नहीं है

बिखर गए हैं सारे सपने, मंजिल का मुझे ज्ञान नहीं है।

आप से रिश्ता कोई भले नहीं, अलगाव का भान नहीं है।

रिश्ते तो गैरों से होते, अपनों से कोई, व्यवधान नहीं है।

आप भले ही भिन्न समझतीं, अपना-पराया कोई नहीं है।

हम तो एक सदैव रहेंगे, आपको भले ही अहसास नहीं है।

तन से हो जाओ भले दूर, धन की हमें दरकार नहीं है।

मन तो हमें आप दे ही चुकीं हैं, वापसी का आधार नहीं है।

हिम्मत हो तो सामने आओ, नजर मिला कहो प्यार नहीं है।

Sunday, July 19, 2015

दुनियाँ के आगे क्यूं चेहरा छुपाती हो

आप हो हमारी हम आपके हैं हो चुके,
कहने में प्यारी आज क्यूँ शरमाती हो।
अपने को हमें आप पहले ही सौंप चुकी,
मिलने से आज फिर क्यूँ कतराती हो।
प्रेम की पथिक हो, निर्णय कर चुकीं,
दुनियाँ के आगे क्यूं चेहरा छुपाती हो।
छोड़ लोक-लाज, हमारे साथ आ ही चुकीं,
मिलन के पल नहीं, क्यूँ हरषाती हो।

Wednesday, July 15, 2015

जीवन की गति ने बतलाया

प्रेम का मतलब पाना नहीं है


जीवन की गति ने बतलाया, गीत का मतलब गाना नहीं है।

आपने ही हमको बतलाया, प्रेम का मतलब पाना नहीं है।

प्रेम नहीं है कठौती किसी की

प्रेम नहीं है कसौटी किसी की।

प्राणों की रसमय यह धारा,

प्रेम नहीं है बपौती किसी की।

प्रेम के अर्थ को सीमित ना करो, उपहारों का आना नहीं है।

आपने ही हमको बतलाया, प्रेम का मतलब पाना नहीं है।।

सृश्टि का कण-कण है प्यारा,

प्रकृति ने ही तो हमें दुलारा।

आप भी तो प्रकृति की कृति हो,

चेहरा आपका कितना प्यारा।

हमने हर पल ही समझाया, मन-मूरख है माना नहीं है।

आपने ही हमको बतलाया, प्रेम का मतलब पाना नहीं है।

चाँद में भी तो चेहरा आपका,

सूरज में भी लगे, तेज आपका।

प्रकृति के कण-कण में रमी हो,

सागर भी तो दिल है आपका।

हम तो इतना ही समझे हैं, दिल किसी का दुखाना नहीं है।

आपने ही हमको बतलाया, प्रेम का मतलब पाना नहीं है।

Sunday, June 21, 2015

वियोग सहा है बहुत ही अब तक

गीत मिलन के भी गा जाओ


गले  लगो अब तो आ जाओ,

अन्तर तम में तुम छा जाओ।

वियोग सहा है बहुत ही अब तक

गीत मिलन के भी गा जाओ।

शिकवे शिकायत दूर करेंगे,

एक-दूजे के जब हो लेंगे।

डरती क्यों हो कठिनाई से,

मिलकर कष्टों  को जी लेंगे।

Saturday, June 20, 2015

कामाग्निी में तपी हुई हो

कह नहीं सकते साथ नहीं हो


आप हमारे पास नहीं हो,
कह नहीं सकते साथ नहीं हो।
आप आज भी छिपी हो उर में,
कैसे कहें अब आश नहीं हो।

हम साथ आपके ही जीते हैं,
नयनों की मस्ती पीते हैं।
कपोलों  की अरूणाई चूमें,
अधरामृत भी हम पीते हैं।

शरीर आपका दूर है भागा,
मन से हमने बाँधा तागा।
आपको नहीं छोड़ सकते हम,
जीते गीत आपके गा-गा।

आप ही दिल में बसी हुई हो,
आलिंगन में कसी हुई हो।
कहने में सकुचाती क्यों हो?
कामाग्निी में तपी हुई हो।

Tuesday, June 16, 2015

हँसने के दिन बीत चुके

अब घुट-घुट करके जीना है




जान-बूझकर नरक में कूदा, पी ले हलाहल पीना है।

हँसने के दिन बीत चुके, अब घुट-घुट करके जीना है।।

कैसे निभायेगा जिम्मेदारी?

धोखा मिला, धोखे से यारी

विश्वास किया, तूने जिस पर

छल के अंकुर, छल की क्यारी।

कर में आये कांच के टुकड़े, तूने  समझे नगीना हैं।

हँसने के दिन बीत चुके, अब घुट-घुट करके जीना है।।

कर्म पथ पर चलेगा कैसे?

सोते हुए को तजेगा कैसे?

जिनको अपने कहता है तू,

उनके दुख को सहेगा कैसे?

अकर्मण्य  हैं साथी  तेरे,  तूने  बहाना पसीना है।

हँसने के दिन बीत चुके, अब घुट-घुट करके जीना है।।

मरना चाहे मर नहीं सकता,

जिम्मेदारी तज नहीं सकता

प्रेम का नाटक होता है नित,

तू तो नाटक कर नहीं सकता।

समझाया, समझ न पाया, खुद ही निकला कमीना है।

हँसने के दिन बीत चुके, अब घुट-घुट करके जीना है।।

शिकायत नहीं आपसे कोई

शिकायत केवल अपने से है


जो-जो सीख आपने दी थीं

बोले नहीं चुपचाप ही पी थीं।

हृदयंगम आज कर रहे उनको,

जीवन में जो आपने जी थीं।

शिकायत नहीं आपसे कोई,

शिकायत केवल अपने से है।

आप तो मिली बहुत पहले ही

अज्ञानी थे,  हमने खोईं।

फसल वहीं हम काट रहे हैं,

हमने मिलकर जो थीं, बोई।

मासुम सी ख़्वाहिश थी

फ़ेसबुक पर रोजगार समाचार के हवाले से सोनिया 


खटकर द्वारा प्रकाशित पोस्ट मुझे पसन्द आई आप 


भी पढ़िये-


पैर की मोच
और
छोटी सोच,
हमें आगे
बढ़ने नहीं देती ।
टुटी कलम
और
औरो से जलन,
खुद का भाग्य
लिखने नहीं देती ।
काम का आलस
और
पैसो का लालच,
हमें महान
बनने नहीं देता ।
अपना मजहब उंचा
और
गैरो का ओछा,
ये सोच हमें इन्सान
बनने नहीं देती ।
��दुनिया में सब चीज
मिल जाती है,....
केवल अपनी गलती
नहीं मिलती...
�� Some lines with deep meanings. ...
��: बुलंदी की उडान पर हो तो ,
जरा सब्र रखो।
परिंदे बताते हैं कि ,
आसमान में ठिकाने नही होते ।।
��: चढ़ती थीं उस मज़ार पर चादरें बेशुमार ,
लेकिन बाहर बैठा कोई फ़क़ीर सर्दी से मर गया।।
��: कितनी मासुम सी ख़्वाहिश थी इस नादांन दिल की ,
जो चाहता था कि.. शादी भी करूँ और ....
ख़ुश भी रहूँ ।।
��: छत टपकती है उसके कच्चे घर की , वो किसान फिर भी बारिश की दुआ माँगता है ।।
��: तेरे डिब्बे की वो दो रोटिया कही भी बिकती नहीं ,
माँ ...........
होटल के खाने से आज भी भूख मिटती नहीं ।।
��: सीख रहा हूं अब मैं भी इंसानों को पढने का हुनर ,
सुना है चेहरे पे किताबों से ज्यादा लिखा होता है ।।
��: लिखना तो ये था कि खुश हूँ तेरे बगैर भी ,
पर कलम से पहले आँसू कागज़ पर गिर गया ।।
��: " मैं खुल के हँस तो रहा हूँ फ़क़ीर होते हुए ,
वो मुस्कुरा भी न पाया अमीर होते हुये ।।
�� : कैसी लगी, अगर अच्छी लगीं हों तो औरो को भी भेज देना ।
दोस्तो आपको हमारी ये पोस्ट कैसी लगी हमे जरूर वताये और ज्यादा से ज्यादा शेयर करके अपने दोस्तो को भी पढवाये॥

Sunday, June 14, 2015

प्रेम का पथ पथरीला, टेढ़ा,

फकीरी ही जिस पर है फलती


जब प्रेमी पथ पर चल देते,

अपनी नाव स्वयं ही खेते।

साथ न कोई उनका देता, 

दुनियाँ तो बस गले ही रेते।


दुनियाँ तो लकीर पर चलती,

काँटों से हर पल ही डरती।

प्रेम का पथ पथरीला, टेढ़ा,

फकीरी ही जिस पर है फलती।

Friday, June 12, 2015

प्रेम के दुश्मन

कायर ना चल पायें संग में



प्रेम के दुश्मन, कदम-कदम पर

चलना पथ पर संभल-संभल कर

दुनियाँ पागल कहेगी, ठुकरायेगी,

हमको बढ़ना होगा जोखिम लेकर

जब अपने ही ठुकरा के कहेंगे

प्रेम को, प्रेमी ही बकवास कहेंगे

सब कुछ सहा है, और भी सहेंगे,

आप मिलो तो कर भी गहेंगे।


प्रेम के दुश्मन हैं इस जग में,

कोई न साथी है इस मग में।

सभी विरोधी बन जाते हैं,

मौत भी मिल सकती है पल में।

प्रेम की राह नहीं है जग में,

सपने भी मिट जाते पल में।

जोखिम भरी राह गढ़नी है,

कायर ना चल पायें संग में।

Sunday, June 7, 2015

मजबूरी के ये रिश्ते-नाते, मजबूरी में भी जीना है

अविश्वास का विष



मजबूरी  के ये रिश्ते-नाते, मजबूरी  में भी जीना है।

अविश्वास का विष भी प्यारे, सुधा समझकर पीना है।।

कर्तव्य पथ पर आगे बढ़

कर्म पथ की सीढ़ी चढ़

स्थिर प्रज्ञ हो आगे देख

जीवन पथ फिर से गढ़

कर्तव्य पथ पर बढ़ प्रतिपल, खून को बना पसीना है।

 अविश्वास का विष भी प्यारे, सुधा समझकर पीना है।।

अधिकार नहीं, कर्तव्य याद कर,

अपेक्षा नहीं, न ही फरियाद कर

सबको गले लगाता चल बस

निस्वार्थ नित तू परोपकार कर

कण्टक पर्वत टकराकर भी, जीवन बहुमूल्य नगीना है।

अविश्वास का विष भी प्यारे, सुधा समझकर पीना है।।

समय बिताना नहीं है हमको

उपयोगी हैं पल-पल हमको

किसकी खातिर ठहरगें हम?

साथ में चाहो, चलना तुमको

राष्ट्रप्रेमी चलना ही पथ है, जीवन प्रति पल जीना है।

अविश्वास का विष भी प्यारे, सुधा समझकर पीना है।।