Saturday, June 20, 2015

कामाग्निी में तपी हुई हो

कह नहीं सकते साथ नहीं हो


आप हमारे पास नहीं हो,
कह नहीं सकते साथ नहीं हो।
आप आज भी छिपी हो उर में,
कैसे कहें अब आश नहीं हो।

हम साथ आपके ही जीते हैं,
नयनों की मस्ती पीते हैं।
कपोलों  की अरूणाई चूमें,
अधरामृत भी हम पीते हैं।

शरीर आपका दूर है भागा,
मन से हमने बाँधा तागा।
आपको नहीं छोड़ सकते हम,
जीते गीत आपके गा-गा।

आप ही दिल में बसी हुई हो,
आलिंगन में कसी हुई हो।
कहने में सकुचाती क्यों हो?
कामाग्निी में तपी हुई हो।

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