दीपोत्सव
घर-घर दमकें मानिक मोती,
घर-घर ईश वन्दना होती।
घर-घर जगमगाय रही जोती,
हर घर लक्ष्मी पूजा होती।
लक्ष्मी और गोवर्धन पूजा,
भाई बहिन सा नाता न दूजा।
सबसे मोहक जैसे चूजा,
हर्ष से सारा घर है गूंजा।
बच्चे चलाते चकरी पटाके,
धायं-धायं और धायं धमाके।
स्वयं हंसे औरों को हंसा के,
बच्चे करते बहुत तमाशे।
अंधियारी हो भले ही रात ,
दीप ज्योति से लगे प्रभात।
दीपावली सिखाती बात,
उन्नति सब मिल करें हठात।
सत्य असत्य पर विजय है पाता,
धर्म अधर्म से आगे आता।
अनाचार का नाश हो जाता,
दीपावली का पर्व बताता।
बच्चे सबके मन को भाते,
मनोबल सबका बहुत बढ़ाते।
पत्थर दिल को भी पिघलाते,
दीपोत्सव का पर्व मनाते।
योग गतिविधि नहीं, जीवनशैली
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*योग : कोई गतिविधि नहीं, जीवन शैली है*
डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी
आम आदमी के लिए योग का अर्थ है — सुबह-सुबह पार्क में जाकर दो-चार आस...
3 weeks ago

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