नयी प्रेरणा
फागुन है ऐसा मुस्काता
ज्यों कलियों में जीवन।
घर-घर सूरज है खिलता,
आंगन में सजता उपवन।
द्वार-द्वार है खुशी खेलती,
बाल वृद्ध सब हैं उत्साही।
कैसे घोल सकेगा कोई ,
इस उत्सव में स्याही।
लेकर नव संकल्प बढे़ हम,
नयी प्रेरणा होली से।
सबको ही बाटें मुस्कानें,
नहीं डरें हम गोली से।
तनाव का मूल-लोग क्या कहेंगे?
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‘लोग क्या कहेंगे?’
©डा.संतोष
गौड़ राष्ट्रप्रेमी
[image: Rounded Rectangle: जन सामा...
2 weeks ago

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