‘लोग क्या कहेंगे?’
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* सामान्यतः सफलता की चूहा दौड़ में व्यक्ति सफलता पाकर भी असफल ही रहता है।
उसके सामने एक यक्ष प्रश्न सदैव बना रहता है-*
*‘लोग क्या कहेंगे?’*
*व्यक्ति की स...
1 week ago
"मुझे संसार से मधुर व्यवहार करने का समय नहीं है, मधुर बनने का प्रत्येक प्रयत्न मुझे कपटी बनाता है." -विवेकानन्द
लोगों का क्या? लोगों का क्या? कहते कुछ भी, आगे बढ़ते जाना है। पथिक हैं हम और पथ जीवन है, चलते-चलते गाना है।। नहीं किसी को सीख है देनी। सबकी ...
"स्वतन्त्र भारत में नारी को मिले वैधानिक अधिकारों की कमी नहीं- अधिकार ही अधिकार मिले हैं, परन्तु कितनी नारियां हैं जो अपने अधिकारों का सुख भोग पाती हैं? आप अपने कर्तव्यों के बल पर अधिकार अर्जित कीजिए। कर्तव्य और अधिकार दोनों का सदुपयोग कर आप व्यक्ति बन सकती हैं। आपको अपने कर्तव्यों का भान है तो कोई पुरुष आपको भोग्या नहीं बना सकता-व्यक्ति मानकर सम्मान ही करेगा। इसी तरह आने वाली पीढ़ी आपकी ऋणी रहेगी।"
sir i am really so much interested on the topic Global Warming. whats ur programmes, may i know???
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