Monday, September 14, 2026

केवल करें क्यों आराधना?

 जीवन साधना 

            डा संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी


केवल करें क्यों आराधना? 

आओ मिल हम करें साधना।।


आराधना में हमें, मिले मंत्र हैं। 

साधना में, सफलता का तंत्र है। 

विकास पथ पर आनंद से चलना, 

साधक साध्य है, नहीं यंत्र है। 


आराधना में, माँग है छिपी,

साधना में, उर आग है जगी।

एक में हाथ फैलाए मांगते, 

दूसरा लिखे, विकास की लिपी।।


केवल करें क्यों आराधना?

आओ मिल हम करें साधना।।


पुष्प है, चढ़ाया, आराधना,

पुष्प है, खिलाया, है साधना।

मूर्ति पर जल चढ़ा, मांगना,

साधना सृजन है, नहीं कामना।।


केवल करें क्यों आराधना?

आओ मिल हम करें साधना।।


तिलक-दीप-धूप आराधना,

हल-कुदाल-कलम, साधना।

मंदिर में शीश झुका कामना,

राष्ट्र पर शीश, कोई, आवाज ना।।


केवल करें क्यों आराधना?

आओ मिल हम करें साधना।।


शब्द रटना है, बस आराधना,

भाव को जी लेना, है साधना।

गीता पाठ तो बड़ा सरल है,

गीता मिल कर्म, नहीं कोरी भावना।।


केवल करें क्यों आराधना?

आओ मिल हम करें साधना।।


एकाकी जपना आराधना,

कर्म संग तपना, है साधना।

आराधना है कुछ चाहना,

साधना में बचे, कोई चाह ना।।


केवल करें क्यों आराधना?

आओ मिल हम करें साधना।।


राष्ट्रप्रेमी चले, करे आह्वान यही,

पूजा करो, न करो, सब सही।

जब तक मानव मन, बने राष्ट्र-मंदिर,

तब तक कर्म-दुग्ध, साधना दही।।


केवल करें क्यों आराधना?

आओ मिल हम करें साधना।।


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