Thursday, May 11, 2017

जिसको जाना जाय

हमारे साथ चल सके, साथ हमारे आय।

अपना पथ ना हम तजे, जिसको जाना जाय॥



जो सबका ही मित्र है, नहीं किसी का होत।

चन्द और सूरज हुए, कभी किसी की जोत॥



हम साथी थे चाहते, उनकी चाह गुलाम।

लुटकर भी हम बढ़ रहे, करते हुए सलाम॥



कोई अपना ना हुआ, सब स्वार्थ के दास।

सच राही से चाहते, रहे असत के पास॥



मैं पथ का बस पथिक हूं, नहीं कहीं है गेह।

ठोकर से आगे बढ़ा, बाधा बना सनेह॥



ना लाया पाया यहीं, सब कुछ जाऊं छोड़।

जीवन पथ अपने चला, नहीं किसी से होड़॥



स्वारथ हित जो चाहते, नहीं हैं तेरे मित्र।

निस्वार्थ हों यदि शत्रु भी, खींच उन्हीं के चित्र॥



पथ के बाधक मित्र जो, साथ न उनका देख।

शत्रु के सहयोग से तू, लिख विकास आलेख॥



जो मिलता इस राह में, करना ना तू चाह।

अपने पथ तू आगे बढ़ ले, कर ना तू परवाह॥



कुछ करने से मिलत है, कुछ यूं ही मिल जात।

कीया वह अपना रहा, बाकी यूं ही जात॥



जग में सब कुछ मिलत है, जो जिसके है जोग।

जिसने जितना कर लिया, उतना मिलता भोग॥



अपने को न लगाव है, ना कोई है आश।

सच की बस चाहत रही, ना सुननी बकवाश॥



जग में सब मिल जात है, करते हैं जो कर्म।

झूठ बोल छलना करें, मिलती केवल शर्म॥



जो खाई हैं खोदते, गिरते खुद ही लोग।

कुआ खोद ही जगत में, हो जल का उपभोग॥



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