कैसा बसन्त?
कोयल की ये मधुर मल्हारें,
उसको लगतीं करुण पुकारें,
सबसे यही मनोती मॉगे,
प्रियतम आकर उसे दुलारें।
इन्द्रधनुष की सभी छटाएं,
उसको अंगारे बरसाएं,
कैसा बसन्त वह क्या जाने,
निशा वियोग की जिसे सताएं।
काक तू वैरी रोज पुकारे,
प्रियतम कौ सन्देश सुना रे,
मुझ विरहनि को धीर बधा के,
अपनी बिगड़ी जात बना रे।
तनाव का मूल-लोग क्या कहेंगे?
-
‘लोग क्या कहेंगे?’
©डा.संतोष
गौड़ राष्ट्रप्रेमी
[image: Rounded Rectangle: जन सामा...
3 days ago

No comments:
Post a Comment
आप यहां पधारे धन्यवाद. अपने आगमन की निशानी के रूप में अपनी टिप्पणी छोड़े, ब्लोग के बारे में अपने विचारों से अवगत करावें.