Saturday, May 30, 2026

जीत हार अब पीछे छूटी

 नहीं चाह अब रही हमारी, चाह रहे बस खुशी तुम्हारी। 

जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।। 

कैसे खुश रहना सीखो तुम, 

चलना ही जीवन सीखो तुम। 

सुनना और देखना सीखो, 

चुप रहना भी सीखो तुम।

नहीं कोई इच्छा थोपेंगे हम, नहीं रोकेंगे राह तुम्हारी। 

जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।। 

लोगों की सुनना छोड़कर। 

नहीं जोड़ना तुम्हें तोड़ कर। 

मन की कर लो, खुशियाँ जी लो, 

नहीं ले जाना तुम्हें मोड़ कर। 

अपनी करना, अपना जीना, खुलती जाएं राह तुम्हारी। 

जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।। 

अपने को स्वीकार करें हम। 

जीना छोड़ें औरों के गम। 

अपने लिए हो समय हमारा, 

दिल से अपने कर्म करें हम। 

मन-वचन और कर्म एक हो, खुशियाँ गाएं राह तुम्हारी। 

जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।। 

पास होने की नहीं है चाहत। 

नहीं चाहिए अब कोई राहत।

अपनी सोच उतार जमीन पर, 

पूरी कर अब अपनी चाहत। 

उत्कर्ष की राह बढ़ो तुम, प्रफुल्लित हों बांह तुम्हारी। 

जीत हार अब पीछे छूटी, तुम्हारी जीत ही जीत हमारी।। 


Sunday, May 24, 2026

लोगों का क्या? कहते कुछ भी,

 लोगों का क्या?


लोगों का क्या? कहते कुछ भी, आगे बढ़ते जाना है।

पथिक हैं हम और पथ जीवन है, चलते-चलते गाना है।।

नहीं किसी को सीख है देनी।

सबकी अपनी-अपनी बेनी।

नहीं किसी को सीख है भाए,

खुद ही खुद से सीख है लेनी।

सबका अपना-अपना पथ है, अपना कर्म कर पाना है।

पथिक हैं हम और पथ जीवन है, चलते-चलते गाना है।।

कारण बिन कोई कार्य न होता।

काटत है नर, जो है वह बोता।

कर्म के बिना, नहीं कुछ मिलता,

नकल करे नर, वह है रोता।

अपना वही, अपनत्व जहाँ है, जिसने अपना माना है।

पथिक हैं हम और पथ जीवन है, चलते-चलते गाना है।।

प्रक्रिया है खुद ही सफलता।

कर्म बिना कैसी असफलता?

चलने की बस चाह निराली,

जिस पथ चलते, वह है फलता।

प्रकृति से संचालित अवयव, किया नहीं, मनमाना है।

पथिक हैं हम और पथ जीवन है, चलते-चलते गाना है।।

लोगों का नहीं कोई ठिकाना।

जहाँ जाओगे, वहीं है पाना।

असफलता पर वे हँस देंगे,

सफलता पर, ताली बजााना।

जो चाहे, वह हमको कह ले, कर्म ही अपना ठिकाना है।

पथिक हैं हम और पथ जीवन है, चलते-चलते गाना है।।