ठूंठ
सूखे के बाद
आई बरसात
जन-मन-गण के खिले गात
सूखे विटपों पर
आए हरे पात
तू बता
क्यूं अब तक ठूंठ?
बोलना मत झूंठमौन!
अच्छा, समझा,
तू है,आदमजात
बहुत कुछ छुपाया है,
राहत के नाम पर कमीशन खाया है
किन्तु, बन्धु
अब तो, समय चुनाव का आया है।
"मुझे संसार से मधुर व्यवहार करने का समय नहीं है, मधुर बनने का प्रत्येक प्रयत्न मुझे कपटी बनाता है." -विवेकानन्द
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